6 अप्रैल को चेक बाउंस हुआ तो हो सकती है जेल – जानें सुप्रीम कोर्ट का नया नियम Cheque Bounce Law

By Pragati

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भारत में चेक के माध्यम से लेन-देन करना आम बात है, लेकिन अगर दिया गया Cheque Bounce Law हो जाए तो यह एक गंभीर कानूनी मामला बन सकता है। हाल ही में Supreme Court of India ने चेक बाउंस के मामलों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार अदालतों को ऐसे मामलों की सुनवाई तेजी से करनी होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

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इसका उद्देश्य यह है कि जो लोग जानबूझकर चेक बाउंस करते हैं या मामले को लंबे समय तक लटकाते हैं, उन पर कानूनी शिकंजा कस सके।

चेक बाउंस क्या होता है

चेक बाउंस तब होता है जब कोई व्यक्ति भुगतान के लिए चेक देता है लेकिन उसके बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होती। ऐसी स्थिति में बैंक चेक को अस्वीकार कर देता है।

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इसके अलावा चेक बाउंस होने के कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे:

जब चेक बाउंस होता है तो बैंक एक मेमो जारी करता है जिसमें बाउंस होने का कारण लिखा होता है। इसी मेमो के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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चेक बाउंस से जुड़ा कानून

भारत में चेक बाउंस से जुड़े मामलों को Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के तहत अपराध माना जाता है। इस कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर चेक बाउंस करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इसमें दोषी पाए जाने पर निम्न सजा हो सकती है:

यह कानून व्यापारिक लेन-देन में भरोसा बनाए रखने के लिए बनाया गया है।

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अदालत की नई सख्ती

हाल के निर्देशों में अदालतों को चेक बाउंस मामलों की सुनवाई जल्दी पूरी करने के लिए कहा गया है। पहले कई मामलों में वर्षों तक सुनवाई चलती रहती थी, जिससे पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलने में देर होती थी।

अब अदालतों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर किया जाए। यदि आरोपी बार-बार अदालत में उपस्थित नहीं होता या सुनवाई टालने की कोशिश करता है, तो उसकी जमानत भी रद्द की जा सकती है।

चेक बाउंस होने पर कानूनी प्रक्रिया

अगर किसी व्यक्ति का चेक बाउंस हो जाता है, तो पीड़ित को सबसे पहले आरोपी को कानूनी नोटिस भेजना होता है। यह नोटिस चेक बाउंस की जानकारी मिलने के 30 दिनों के भीतर भेजना जरूरी होता है।

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नोटिस मिलने के बाद आरोपी के पास 15 दिन का समय होता है कि वह भुगतान कर दे। यदि वह इस अवधि में भुगतान नहीं करता, तो पीड़ित व्यक्ति अदालत में शिकायत दर्ज कर सकता है।

अदालत में शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी को समन भेजा जाता है और सुनवाई शुरू होती है।

चेक बाउंस से बचने के उपाय

चेक बाउंस से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है।

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यदि किसी कारण से चेक बाउंस हो जाता है, तो तुरंत संबंधित व्यक्ति से संपर्क करके भुगतान करने की कोशिश करनी चाहिए।

डिजिटल भुगतान एक बेहतर विकल्प

आज के समय में डिजिटल भुगतान के कई सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं। जैसे:

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इन माध्यमों से तुरंत भुगतान किया जा सकता है और चेक बाउंस जैसी समस्या से बचा जा सकता है। इसलिए कई लोग अब बड़े लेन-देन के लिए भी डिजिटल भुगतान का उपयोग करने लगे हैं।

चेक बाउंस एक गंभीर कानूनी मामला है और इसमें सजा का प्रावधान भी है। अदालतों की सख्ती के बाद अब ऐसे मामलों में जल्द कार्रवाई होने की संभावना है।

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इसलिए अगर आप चेक के माध्यम से लेन-देन करते हैं, तो हमेशा सावधानी बरतें और सुनिश्चित करें कि आपके खाते में पर्याप्त राशि हो। सही जानकारी और सावधानी से आप कानूनी परेशानी से आसानी से बच सकते हैं।

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